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Monday, August 3, 2020

बढ़े कोलेटस्ट्रॉल से हैं परेशान तो जान लें कैसे करें इसे कंट्रोल

Some Tips to increase HDL Cholesterol level in your Body
हमारे खान-पान का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। बात अगर दिल की बीमारियों की करें तो इसका सीधा संबंध कोलेस्ट्रॉल से है। एक हालिया शोध से पता चला है कि अगर आप अपने शरीर में बढ़े कोलेटस्ट्रॉल के स्तर से परेशान हैं तो इसे कम करने के लिए आपको सैचुरेटेड फैट(संतृप्त वसा)  की बजाय कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों पर लगाम लगानी होगी।

अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के मुताबिक हमेशा से यही कहा जाता रहा है कि उन खाद्य पदार्थों को त्याग दें, जिनमें सैचुरेटेड फैट होता है। इसी वजह है जिन मरीजों का कोलेस्ट्रॉल बढ़ा होता है, उन्हें पैकेटबंद चीजें खाने से भी मनाही होती है, जैसे चिप्स या बेकरी उत्पाद लेकिन हमारे इस अध्ययन से यह पता चला है कि इंसान के शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाने में सैचुरेटेड फैट नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट का सबसे बड़ा हाथ है।

शोधकर्ता ने किया दावा-
दक्षिण फ्लोरिडा विश्विद्यालय के शोधकर्ता  और प्राफेसर डेविड डायमंड कहते हैं हाई कोलेस्ट्रॉल का प्रकार यानी हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया बीमारी से जूझ रहे मरीजों को पिछले 80 सालों से ही ये सुझाव दिए जा रहे हैं कि वे अपने खान-पान में संतृप्त वसा की मात्रा को कम से कम कर दें, जो कि गलत साबित हो गया है। सच तो यह है कि दिल को बीमार होने से बचाना है तो कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन से दूरी बनानी होगी न कि सैचुरेटेट फैट यानी संतृप्त वसा से।

कम कार्ब आहार रखेगा सुरक्षित-
दिल से दोस्ती करनी है तो अपनी कार्ब डाइट को फॉलो करें क्योंकि शोध में यह बात सामने आई है कि जो लोग कम कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजों का सेवन करते थे, उनमें दिल से जुड़ी बीमारी होने का खतरा काफी कम था। कम कार्ब आहार सुरक्षित है, इसलिए शोधकर्ताओं ने इस पर जोर दिया है। कार्बोहाइड्रेट के सेवन से कोलेस्ट्रॉल का स्तर तेजी से बढ़ता है और शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जो बेशक दिल से जुड़ी बीमारियों को न्योता देती है। जिन लोगों को मधुमेह या मोटापे की समस्या है, उनके लिए भी ‘लो कार्ब डाइट’ मददगार साबित हो सकती है।

दिल को नहीं कोई खतरा-
जर्नल ऑफ द अमेरिकी कॉलेज और कार्डियोलॉजी में  छपा यह शोध कहता है कि ऐसा कोई भी भोजन, जो रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ाता है जैसे कि, ब्रेड, आलू, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक्स इनसे परहेज करने में ही भलाई है। इस अध्ययन में एक भी ऐसा सबूत नहीं मिला, जिससे यह बात पुख्ता हुई हो कि सैचुरेटेड फैट(संतृप्त वसा) की कमी या वृद्धि से मरीज के कोलेस्ट्रॉल का स्तर प्रभावित हुआ हो। शोधकर्ताओं ने कहा, लोग सैचुरेटेड फैट की मात्रा थोड़ी कम कर सकते हैं पर इसे पूरी तरह से बंद करने की कोई जरूरत नहीं है। बेफिक्र रहें क्योंकि यह आपको दिल की बीमारी की ओर नहीं ले जाएगा।

Saturday, November 17, 2018

वृक्षासन कैसे करें



वृक्षासन | Vrikshasana | Tree Pose



वृक्ष- पेड़, आसान


यह आसन से वृक्ष की शांत एवं स्थिर अवस्था को दर्शाता हैI अन्य योगासनों के विपरीत इस आसन में हमे अपने शरीर के संतुलन को बनाये रखने के लिए आंखे खुली रखनी पड़ती हैंI
  • हाथों को बगल में रखते हुए सीधे खड़े हो जाएँ।
  • दाहिने घुटनें को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाएँ जंघा पर रखेंI आपके पैर का तलवा जंघा के ऊपर सीधा एवं ऊपरी हिस्से से सटा हुआ हो।
  • बाएँ पैर को सीधा रखते हुए संतुलन बनाये रखें।
  • अच्छा संतुलन बनाने के बाद गहरी साँस अंदर लें, कृतज्ञता पूर्वक हाथों को सर के ऊपर ले जाएँ और नमस्कार की मुद्रा बनाएंI
  • बिल्कुल सामने की तरफ देखें, सीधी नज़र सही संतुलन बनाने में अत्यंत सहायक हैI
  • रीढ की हड्डी सीधी रहे I आपका पूरा शरीर रबर बैंड की तरह तना हुआ होI हर बार साँस छोड़ते हुए शरीर को ढीला छोडते जाएँ और विश्राम करें, मुस्कुराते हुए शरीर और साँस के साथ रहेंI
  • धीरे-धीरे साँस छोड़ते हुए हाथों को नीचे ले आयेंI धीरे से दाहिने पैर को सीधा करेंI
  • सीधे लम्बे खड़े हो जाए बिल्कुल पहले की तरहI अब बाएँ तलवे को दाहिने जांघ पर रख कर आसन को दोहराएंI
वृक्षासन के लाभ | Benefits of Vrikshasana
  • इस आसन को करने के पश्चात आप ऊर्जा से परिपूर्ण महसूस करते हैं। यह आसन पैर, हाथों और बाजुयों की मांस-पेशियों में खिंचाव पैदा करता है और आपको पुनः तरो-ताज़ा कर देता है।
  • यह मस्तिष्क में स्थिरता और संतुलन लाता हैI
  • एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हैI
  • यह आसन पैरों को मजबूती प्रदान करता है एवं संतुलन बनाने में सहायक हैIजांघो के फैलाव में भी सहायक हैI
  • नसों की दर्द में अत्यंत सहायक हैI
वृक्षासन की सावधानियां | Contraindications of Vrikshasana

  • अगर आप माइग्रेन, अनिंद्रा, अल्प या उच्च रक्तचाप से पीड़ित है तो यह आसन न करेंI (उच्च रक्तचाप वाले इस आसन को हांथो को सर के ऊपर ले जाए बिना कर सकते हैंI हांथो को ऊपर ले जाने से रक्तचाप बढ़ सकता है।

पश्चिम नमस्कार आसन



यहाँ पर पश्चिम शब्द दिशा की ओर न संकेत कर पीछे की ओर के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।

पश्चिम नमस्कारासन या पीछे की ओर का नमस्कार, शरीर के ऊपरी भाग को मजबूत करता है और मुख्यतः भुजाओं और पेट पर काम करता है। इसे विपरीत नमस्कारासन भी कहते हैं।

पश्चिम नमस्कारासन की विधि | How to do Paschim Namaskarasana
Reverse Prayer Yoga Pose - Paschim Namaskarasana Yoga Pose


  • ताड़ासन से प्रारम्भ करें।
  • अपने कंधो को ढीला रखे और अपने घुटनो को थोड़ा मोड़े।
  • अपनी भुजाओं को पीछे की ओर ले जाएँ और उँगलियों को नीचे की ओर रखते हुए अपनी हथेलियों को जोड़े।
  • सांस भरते हुए उँगलियों को रीढ़ की हड्डी की ओर मोड़ते हुए ऊपर करें।
  • ध्यान रखे कि आपकी हथेलिया एक दूसरे से अच्छे से सटी हुई और घुटने हल्का सा मुड़े हुए रहे।
  • इस आसन में रहते हुए कुछ साँसे लें।
  • सांस छोड़ते हुए उँगलियों को नीचे कि ओर ले आये।
  • भुजाओं को अपने सहज अवस्था में लें आये और ताड़ासन में आ जाएँ।

पश्चिम नमस्कारासन के लाभ | Benefits of the Paschim Namaskarasana

  • पेट को खोलता है जिससे गहरी साँसे लेना आसान होता है।
  • पीठ के ऊपरी हिस्से में खिचाव आता है।
  • कन्धों का जोड़ और छाती की मांसपेशियों में खिचाव लाता है।

पश्चिम नमस्कारासन के समय की सावधानियां |Contraindications of the Paschim Namaskarasana

  • निम्न रक्तचाप और भुजा या कन्धों में चोट वाले लोग इस आसन को करते समय सावधानी बरते।

जानुशीर्षासन | Janu sirsasana


जानुशीर्षासन करने की प्रकिया | How to do Janu sirsasana

  • पैरों को सामने की ओर सीधे फैलाते हुए बैठ जाएँ,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
  • बाएँ घुटने को मोड़े, बाएँ पैर के तलवे को दाहिनी जांघ के पास रखें, बायाँ घुटना ज़मीन पर रहे।
  • साँस भरें,दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाएँ, खींचे ओर कमर को दाहिनी तरफ घुमाएँ।
  • साँस छोड़ते हुए कूल्हों के जोड़ से आगे झुकें,रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए , ठुड्डी को पंजों की और बढ़ाएँ।
  • अगर संभव हो तो अपने पैरों के अंगूठों को पकडे,कोहनी को जमीन पर लगाएँ,अँगुलियों को खींचते हुए आगे की ओर बढ़े।
  • साँस रोकें। (स्थिति को बनाए रखें)
  • साँस भरें, साँस छोड़ते हुए ऊपर उठें,हाथों को बगल से नीचे ले आएँ।
  • पूरी प्रक्रिया को दाएँ पैर के साथ दोहराएँ।
जानुशीर्षासन के लाभ |Benefits of the Janu sirsasana

  • पीठ के निचले हिस्से का व्यायाम हो जाता है।
  • उदर के अंगों व् कन्धों का व्यायाम हो जाता है।

Friday, November 16, 2018

पूर्वोत्तानासन करने की प्रक्रिया











इस आसन का शाब्दिक अर्थ है - पूर्व दिशा की ओर खींचना, हांलाकि इसका पूर्व दिशा से कोई सम्बन्ध नहीं है।

पूर्वोत्तानासन मुख्यत: ललाट के पूर्वी भाग में सूक्ष्म प्राण ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है।

पूर्व - पूर्व दिशा + उत्तान - अधिकतम खिंचाव + आसन - मुद्रा।

This pose is pronounced as poorvah-uttanah-sanah


पूर्वोत्तानासन करने की प्रक्रिया | How to Practice the Purvottanasana

  • पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाते हुए बैठ जाएँ, पैरों को साथ में रखें, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें।
  • हथेलियों को जमीन पर रखें,कमर के पास या कन्धों के पास, उँगलियों के सिरे शरीर से दूर, बाजुओ को सीधा रखें।
  • पीछे की ओर झुकें और हाथों से शरीर के वजन को सहारा दे।
  • साँस भरें , श्रोणि को ऊपर उठाएँ, शरीर को सीधा रखें।
  • घुटनो को सीधा रखें,पाँव को ज़मीन पर टीकाएँ, पंजो को जमीन पर रखें ,ऐसा करने पर तलवा जमीन पर ही रहेगा,सिर को ज़मीन की ओर पीछे जाने दें।
  • इसी अवस्था में साँस लेते रहें।
  • साँस छोड़ते हुए वापस आएँ,बैठ जाएँ,विश्राम करें।
  • उँगलियों की दिशा को बदलते हुए मुद्राओं को दोहराएँ।
पूर्वोत्तानासन के लाभ |Benefits of the Purvottanasana
  • कलाइयों,भुजाओं, कन्धों,पीठ व् रीढ़ को मजबूती मिलती है।
  • पैरों व् कूल्हों का व्यायाम हो जाता है।
  • स्वसन प्रक्रिया में सुधार करता है।
  • आंतो व् उदर के अंगों में खिंचाव पैदा करता है।
  • थायरॉइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है।
पूर्वोत्तानासन के अंतर्विरोध |Contraindications of the Purvottanasana

  • क्योंकि इस आसन के दौरान पूरे शरीर का भार मुख्यतः कलाई व् हाथों पर आ जाता है इसलिए यदि आपकी कलाई पर चोट लगी हो तो यह आसन न करें। यदि आपकी गर्दन पर चोट लगी हो तो यह आसन बिल्कुल न करें|चोट की स्थिति में आप कुर्सी का सहारा ले सकते हैं।

वशिष्ठासन | Side Plank Pose

वशिष्ठासन | Side Plank Pose






ऋषि वशिष्ठ को भारतवर्ष के सबसे सम्मानीय संतो में से माना जाता है। ऋषि वशिष्ठ सप्तऋषि मंडल के एक ऋषि हैं। वे ऋग्वेद मंडल के सबसे प्रधान व मुख्य लेखक भी हैं।

ऋषि वशिष्ठ के पास एक गाय थी जिसका नाम कामधेनु था। उस गाय का एक बछड़ा था जिसका नाम नन्दिनी था। उस गाय के पास दैविक शक्तियाँ थी और उसने ऋषि वशिष्ठ को बहुत धनवान बना दिया था। इसलिए वशिष्ठ का वास्तविक अर्थ धनवान है।

यह आसन शरीर के ऊपरी हिस्से (छाती, पेट और कंधे) को मज़बूत बनाता है और उसमे स्थिरता लाता है।

वशिष्ठासन करने की प्रक्रिया। How to do Side Plank Pose (Vasisthasana)
  • दंडासन में आ जाएँ।
  • धीरे से अपने शरीर का सारा वज़न अपने दाएँ हाथ और पैर पर रखें। ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि आपका बहिना हाथ और पैर हवा में झूल रहे है।
  • अपने बाहिने पैर को दाहिने पैर पर रखें और बाहिने हाथ को अपने कूल्ह पर रखें।
  • आपका दाहिना हाथ आपके कंधे के साथ होना चाहिए। ध्यान दे की वह आपके कंधे के नीचे न हो।
  • ध्यान दें कि आपके हाथ ज़मीन को दबाएँ और आपके हाथ एक सीध में हो।
  • साँस अंदर लेते हुए अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाएँ। ऐसा प्रतीत होना चाहिए की आपका हाथ ज़मीन पर सीधा खड़ा हुआ है।
  • अपनी गर्दन को अपने उठे हुए हाथ की तरफ मोड़ें और साँस अंदर और बहार करते हुए अपनी हाथों की उँगलियों को देखें।
  • साँस छोड़ते हुए अपने हाथ को नीचे ले आएँ।
  • धीरे से दंडासन में आ जाएँ और अंदर-बहार जाती हुई साँस के साथ विश्राम करें।
  • यही प्रक्रिया दुसरे हाथ के साथ दोहराएँ।

    वशिष्ठासन के लाभ । Benefits of the Side Plank Pose (Vasisthasana)
  • हाथों, कलाई व पैरों की मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।
  • पेट की मासपेशियों को मज़बूत बनाता है।
  • शरीर में स्थिरता बनाता है।
वशिष्ठासन के अंतर्विरोध । Contraindications of the Side Plank Pose (Vasisthasana)
  • जिन लोगो को कलाई में कभी भी चोट लगी हो, वो यह आसन न करें। यदि किसी को कंधे अथवा कोहनी में चोट लगी हो, वो भी यह आसन न करें।

अधोमुख श्वान आसन को आसानी से करने के कुछ नुस्खे

अधोमुख श्वान आसन | Adho Mukha Svanasana




अधोमुख श्वान आसन योगासन

अधो सामने मुख – चेहरा स्वान / श्वान - कुत्ता

अधोमुख स्वान आसन एक कुत्ते (श्वान / स्वान) की तरह सामने की ओर झुकने का प्रतिकात्मक है इसलिए इसे अधोमुख स्वान आसन कहते हैं।

इस योगासन को करने की प्रक्रिया बहुत आसान है और कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसने योगाभ्यास करना शुरू ही किया है, यह आसान कर सकता है। यह योगासन अत्यंत लाभदायक है और इसे प्रतिदिन के योगाभ्यास में अवश्य जोड़ना चाहिए।
अधोमुख श्वान आसन करने की प्रक्रिया | 6 steps to do Adho Mukha Svanasana
  1. अपने हाथों और पैरों के बल आ जाएँ। शरीर को एक मेज़ की स्थिति में ले आयें। आपकी पीठ मेज़ की ऊपरी हिस्से की तरह हो और दोनों हाथ और पैर मेज़ के पैर की तरह।
  2. साँस छोड़ते हुए कमर को ऊपर उठाएं। अपने घुटने और कोहनी को मजबूती देते हुए सीधे करते हुए) अपने शरीर से उल्टा v-आकार बनाएं।
  3. हाथ कंधो के जितने दूरी पर हों। पैर कमर के दूरी के बराबर और एक दुसरे के समानांतर हों। पैर की उंगलिया बिल्कुल सामने की तरफ हों।
  4. अपनी हथेलियों को जमीन पर दबाएँ, कंधो के सहारे इसे मजबूती प्रदान करें। गले को तना हुआ रखते हुए कानों को बाहों से स्पर्श कराएं।
  5. लम्बी गहरी श्वास लें,अधोमुख स्वान की अवस्था में बने रहें। अपनी नज़रें नाभि पर बनाये रखें।
  6. श्वास छोड़ते हुए घुटने को मोड़े और वापस मेज़ वालीस्थिति में आ जाएँ। विश्राम करें।

  7. अधोमुख श्वान आसन को आसानी से करने के कुछ नुस्खे | Tips to do Adho Mukha Svanasana
  • यह आसन करने से पहले अपने पैर की मांसपेसियो और हाथों को अच्छी तरह से तैयार कर लें।
  • अधोमुख स्वान आसन करने से पहले धनुरासन या दण्डासन करें।
  • यह आसन सूर्य नमस्कार के एक अंश के रूप में भी किया जा सकता है।
  • अधोमुख श्वान आसन से पहले किये जाने वाले आसन | Preparatory asanas
  • धनुरासन | Dhanurasana
  • दण्डासन
  • अधोमुख श्वान आसन के बाद किये जाने वाले आसन | Follow up asanas
  • अर्धपिंचा मयुरासन
  • चतुरंग दण्डासन
  • ऊर्ध्व मुख श्वानासन (Urdhva Mukha Svanasana)
  • अधोमुख श्वान आसन के छः लाभ | Adho Mukha Svanasana benefits
  • यह आसन यह आसन शरीर को ऊर्जा देता है और आपको तारो-ताज़ा करता है।
  • यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है । छाती की मांसपेसियो को मजबूती प्रदान करता है और फेफड़े की क्षमता को बढ़ाता है।
  • यह पूरे शरीर को शक्ति प्रदान करता है। विशेषकर हाँथ, कंधे और पैरों को।
  • मांसपेसियो को सुद्रिढ करता है और मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ाता है।
  • को शांति प्रदान करता है एवं सरदर्द, अनिंद्रा, थकान आदि में भी अत्यंत लाभदायक है।
अधोमुख श्वान आसन की सावधानियाँ | Contraindications of the Adho Mukha Svanasana
अगर आप उच्च रक्तचाप, आँखों की केशिकाएँ कमजोर है कंधे की चोट या दस्त से पीड़ित हैं तो यह आसन न करें /

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